
रायपुर (cgreport24.com)। छतीसगढ़ में खैरागढ़ के मनोहर गोशाला में गोमूत्र से फसल अमृत (Fasal Amrit) का निर्माण किया जाता है। इस फसल अमृत (Fasal Amrit) पर इंदिरा गांधी कृषि विवि और दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विवि अंजोरा रिसर्च कर रही है। कामधेनु विवि ने फसल अमृत (Fasal Amrit) की गोभी पर रिसर्च रिपोर्ट मनोहर गोशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी अखिल जैन (पदम डाकलिया) से साझा की है। इस रिपोर्ट के अनुसार गोभी की खेती में किसान को फसल अमृत का उपयोग करने पर एक हेक्टेयर में 25 क्विंटल ज्यादा उत्पादन मिना। इससे 10 हजार रुपए का अधिक लाभ होगा।
एक हेक्टेयर में इतनी पैदावाद
गोशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी अखिल जैन ने बताया, बगैर फसल अमृत के एक हेक्टेयर भूमि पर 275 क्विंटल गोभी का उत्पादन होता है। वहीं फसल अमृत के छिड़काव के बाद 300 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया गया।
कीटनाशक का उपयोग नहीं
फसल अमृत को उपयोग करने पर कामधेनु विवि ने पाया कि गोभी की फसल बदली वाले मौसम में कीट के प्रकोप से ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे समय में फसल अमृत का उपयोग करने से गोभी में एक भी कीटनाशक का उपयोग नहीं किया गया। इसके बाद उत्पादन पूरा प्राप्त हुआ।
ऐसे होता है फसल अमृत का निर्माण
फसल अमृत सनलाइट बेस्ड लिक्विड फर्टिलाइजर है। इसका उपयोग नि:शुल्क लागत पर मनोहर गोशाला खैरागढ़ में किया जाता है। साथ ही इसका नि:शुल्क वितरण किया जाता है।