छत्तीसगढ़

भारत माला घोटाला: जमीन मुआवजा नहीं, सिस्टम की लूट की जांच

ईडी की छापेमारी से खुल रही मनी ट्रेल, अफसर–कारोबारी गठजोड़ पर शिकंजा

रायपुर। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए हुए भूमि अधिग्रहण को अब केवल “मुआवजा गड़बड़ी” नहीं, बल्कि संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर दबिश देकर इसी नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश की है।

ईडी की कार्रवाई का केंद्र हरमीत खनूजा, उनसे जुड़े कारोबारी और तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की भूमिका है, जिन पर तय दर से कहीं अधिक मुआवजा दिलाने और उसकी रकम को अलग-अलग माध्यमों से ठिकाने लगाने का संदेह है।

मनी ट्रेल पर फोकस, बैंक और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले

सूत्रों के मुताबिक, ईडी की 7 टीमें एक साथ तड़के मैदान में उतरीं ताकि लेन-देन से जुड़े अहम सबूत सुरक्षित किए जा सकें। जांच में बैंक खातों, संपत्ति निवेश, फर्जी दस्तावेज और डिजिटल डेटा की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। सीआरपीएफ की सुरक्षा में चल रही यह कार्रवाई संकेत देती है कि मामला संवेदनशील और बड़े स्तर का है।

कारोबारी नेटवर्क भी जांच के घेरे में

महासमुंद के बसंत कॉलोनी में कारोबारी जशबीर सिंह बग्गा के घर छापा इस बात का संकेत है कि मुआवजा राशि को कारोबार और संपत्तियों में खपाने की आशंका है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि किन माध्यमों से पैसा घुमाया गया और लाभार्थी कौन-कौन रहे।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

जांच की आंच कई तत्कालीन राजस्व अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। भूमि रिकॉर्ड में बदलाव, पात्रता निर्धारण और भुगतान प्रक्रिया में सांठगांठ की आशंका के चलते उनके निर्णयों और फाइल मूवमेंट की जांच हो रही है।

आगे और बड़े खुलासों के संकेत

ईडी सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। जैसे-जैसे मनी ट्रेल साफ होगी, वैसे-वैसे नए नाम सामने आ सकते हैं और कुर्की व गिरफ्तारी जैसी कड़ी कार्रवाई भी संभव है।

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