एमिटी यूनिवर्सिटी मामला पहुंचा आयोग, विधवा को मिला हिस्सा, दहेज और आवास प्रकरणों में मानवीय फैसला
महिला आयोग की जनसुनवाई में पीडि़त महिलाओं को मिला हक और भरोसा
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में बुधवार को महिला उत्पीडऩ मामलों की सुनवाई के दौरान कई वर्षों से लंबित मामलों का समाधान हुआ और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाया गया। इसमें प्रमुख रुप से एमिटी यूनिवर्सिटी मामला पहुंचा आयोग, विधवा को मिला हिस्सा, दहेज और आवास मामलों पर अध्यक्ष ने फैसला सुनाया।
बहन की आत्महत्या का दर्द
आयोग अध्यक्ष किरणमयी नायक ने बताया कि प्रार्थी महिला से सुनवाई में बताया कि उसकी बहन ने शादी के मात्र दो महीने बाद ससुराल पक्ष की प्रताडऩा से तंग आकर आत्महत्या कर ली। बहन की मौत के बाद भी परिवार को अपमान और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।आ
योग की समझाइश के बाद मृतका के विवाह में दिए गए सोने-चांदी के गहने और लगभग छह लाख रुपये का सामान मृतका की बहन को वापस दिलाया गया। इसके साथ ही 25 हजार रुपये नगद भी आयोग के समक्ष सौंपे गए।
विधवा को मिला संपत्ति का हक, एमिटी यूनिवर्सिटी मामला गंभीर
एक मामले में वर्ष 2013 में पति को खो चुकी महिला को संयुक्त संपत्ति में उसका हिस्सा नहीं दिया जा रहा था। आयोग के हस्तक्षेप से सास द्वारा 1 लाख 48 हजार रुपये महिला को दिए गए। एक छात्रा की आत्महत्या से जुड़ा मामला एमिटी यूनिवर्सिटी के खिलाफ महिला आयोग पहुंचा। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि मृत छात्रा के मोबाइल को फॉरेंसिक विशेषज्ञ से जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही पुलिस अधिकारियों से जांच रिपोर्ट भी मांगी गई।
बीएसयूपी मकान पर सवालम
हिला ने आरोप लगाया कि मकान के बदले 3 हजार रुपये लेने के बावजूद वर्षों से आवास नहीं दिया गया और मकान तोड़ दिया गया। आयोग ने नगर निगम के अधिकारियों को एक माह के भीतर आवास आबंटन या स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।