छत्तीसगढ़

नए साल में बदला जश्न का मिज़ाज: क्लब नहीं, जंगल चुन रहे सैलानी

छत्तीसगढ़ में ग्रीन टूरिज्म का बूम, टाइगर रिजर्व–अभयारण्य बने न्यू ईयर हॉटस्पॉट

रायपुर। नववर्ष के स्वागत का अंदाज़ बदल रहा है। शोर-शराबे वाले शहर, भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशन और पार्टी डेस्टिनेशन से हटकर इस बार सैलानी शांत, सुरक्षित और प्रकृति के करीब अनुभव की तलाश में छत्तीसगढ़ के जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि राज्य के प्रमुख टाइगर रिजर्व और अभयारण्य 5 जनवरी तक पूरी तरह हाउसफुल हो चुके हैं।

अचानकमार, उदंती–सीतानदी और बारनवापारा अब केवल वन क्षेत्र नहीं, बल्कि न्यू ईयर सेलिब्रेशन के नए सेंटर बनकर उभरे हैं।

ईको-टूरिज्म बना पहली पसंद

पर्यटन विभाग के अनुसार, इस बार की बुकिंग यह संकेत देती है कि पर्यटक अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि सुकून, साइलेंस और सस्टेनेबल टूरिज्म का अनुभव लेना चाहते हैं। जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, एथनिक विलेज ट्रेल और नेचर वॉक जैसी गतिविधियों की मांग अचानक बढ़ी है।

विदेशी सैलानी भी जंगलों की ओर

छत्तीसगढ़ के जंगलों की अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मजबूत होती दिख रही है। यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से आए पर्यटक यहां की ओपन फॉरेस्ट, जैव विविधता और मानव हस्तक्षेप से मुक्त वातावरण को सराह रहे हैं।
लातविया से आई पर्यटक बाइबा कालनीना और ऑस्ट्रेलियाई दल की मौजूदगी यह बताती है कि छत्तीसगढ़ अब इंटरनेशनल नेचर टूरिज्म मैप पर अपनी जगह बना रहा है।

अचानकमार बना टॉप डेस्टिनेशन

अचानकमार टाइगर रिजर्व इस सीजन में सबसे आगे रहा।

  • शिवतराई गेट से संचालित सभी सफारी स्लॉट फुल

  • बैगा एथनिक विलेज और बर्ड नेचर ट्रेल में रोजाना भारी भीड़

  • ऑनलाइन और एडवांस बुकिंग अनिवार्य

यह दर्शाता है कि लोकल कल्चर + नेचर का कॉम्बिनेशन पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहा है।

एडवेंचर और नेचर का संगम

उदंती–सीतानदी क्षेत्र में केवल सफारी ही नहीं, बल्कि

  • देवदहरा जलप्रपात

  • सिकासार जलाशय

  • पैरी उद्गम

  • कठया नदी में कायकिंग

जैसी गतिविधियों ने युवाओं और एडवेंचर प्रेमियों को आकर्षित किया है।

बारनवापारा: नेचर + फेथ टूरिज्म

बारनवापारा अभयारण्य में 15 दिन पहले ही फुल बुकिंग यह दिखाती है कि वन्यजीव पर्यटन के साथ धार्मिक पर्यटन भी बड़ा फैक्टर बन रहा है। तुरतुरिया (वाल्मीकि आश्रम) के कारण यह क्षेत्र ड्यूल टूरिज्म हब के रूप में उभर रहा है।

पर्यटन से बढ़ी स्थानीय अर्थव्यवस्था

इस ट्रेंड का सीधा लाभ स्थानीय गाइड, रिसॉर्ट स्टाफ, वाहन चालक और ग्रामीण क्षेत्रों को मिल रहा है। ईको-टूरिज्म ने साबित किया है कि संरक्षण के साथ रोजगार संभव है।

जंगल केवल जश्न नहीं, जिम्मेदारी भी

वन विभाग ने साफ किया है कि बढ़ती भीड़ के बीच नियमों का पालन अनिवार्य है।
पर्यटकों से अपील की गई है कि वे जंगल को केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि संरक्षित धरोहर मानें।

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