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Share Market Crash: रुपया मजबूत, कच्चा तेल सस्ता, फिर भी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट; निवेशकों के ₹7 लाख करोड़ डूबे

Share Market Crash: सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूटा और निवेशकों को करीब ₹7 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। जानें गिरावट के 5 बड़े कारण और आगे के संकेत।

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबार के दौरान तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। रुपया मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बीच निवेशकों की संपत्ति में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी।

शेयर बाजार में अचानक क्यों बढ़ी गिरावट?

सोमवार को कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रही, लेकिन कुछ समय बाद बाजार में बिकवाली बढ़ने लगी। सेंसेक्स और निफ्टी अपने शुरुआती उच्च स्तर से नीचे आ गए। बाजार में दबाव इतना बढ़ा कि सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से 1,036 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं, निफ्टी भी अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 299 अंक नीचे आ गया।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 624.23 अंक गिरकर 71,848.10 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 160 से ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,352.35 के स्तर पर आ गया। बाजार में आई इस कमजोरी का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा।

रुपया मजबूत और कच्चा तेल सस्ता, फिर भी बाजार क्यों टूटा?

आमतौर पर रुपये में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माना जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव कम हो सकता है।

इसके बावजूद सोमवार को बाजार में तेजी नहीं टिक सकी। इसकी बड़ी वजह वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रही। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्प आकर्षक हो रहे हैं। दूसरी ओर, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। इन परिस्थितियों ने रुपये और कच्चे तेल से मिलने वाले सकारात्मक संकेतों को कमजोर कर दिया।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में शुरुआती छह कारोबारी सत्रों के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 45,125 करोड़ रुपये निकाले।

सितंबर में भी विदेशी निवेशकों की ओर से करीब 45,536 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। लगातार बिकवाली से बाजार में उपलब्ध शेयरों पर दबाव बढ़ता है और प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखने को मिल सकती है।

विदेशी निवेशकों की इस रणनीति के पीछे वैश्विक ब्याज दरें, डॉलर की स्थिति, कंपनियों के मूल्यांकन और अंतरराष्ट्रीय जोखिम जैसे कारक अहम भूमिका निभाते हैं।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है। जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो कुछ निवेशक शेयरों के मुकाबले बॉन्ड में पैसा लगाना पसंद करते हैं। इससे शेयर बाजार में निवेश की मांग प्रभावित हो सकती है।

भारतीय बाजार के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि विदेशी निवेशक अपने निवेश का फैसला कई देशों में मिलने वाले रिटर्न और जोखिम की तुलना करके करते हैं। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण भारतीय बाजार में विदेशी निवेश की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

मिडिल ईस्ट में तनाव से बिगड़ा निवेशकों का भरोसा

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों का माहौल प्रभावित किया है। ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।

मिडिल ईस्ट में तनाव का असर कच्चे तेल की आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और महंगाई की आशंकाओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि, सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, लेकिन इससे बाजार की बाकी चिंताएं दूर नहीं हुईं।

एशियाई बाजारों की गिरावट का भी पड़ा असर

भारतीय बाजार में कमजोरी के पीछे एशियाई शेयर बाजारों से मिले नकारात्मक संकेत भी एक कारण रहे। सोमवार को दक्षिण कोरिया के कोस्पी में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जापान के निक्केई समेत अन्य एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला।

वैश्विक बाजारों में कमजोरी से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने पर भारतीय बाजार में भी बिकवाली तेज हो सकती है।

किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई?

सोमवार के कारोबार में टेक महिंद्रा के शेयर में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आईटीसी, भारतीय स्टेट बैंक, भारती एयरटेल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एलएंडटी, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक के शेयर भी दबाव में रहे।

हालांकि, बाजार के सभी शेयरों में गिरावट नहीं आई। महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और ट्रेंट के शेयरों में करीब 1 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली। निफ्टी ऑटो इंडेक्स भी 1 प्रतिशत से अधिक चढ़ा। इससे साफ है कि प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद कुछ सेक्टर और शेयरों में खरीदारी जारी रही।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

आने वाले कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर निवेशकों की नजर रहेगी। इन कारकों में सुधार होने पर बाजार को सहारा मिल सकता है, जबकि अनिश्चितता बढ़ने पर दबाव बना रह सकता है।

दूसरी ओर, भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर और कंपनियों के मुनाफे से जुड़ी उम्मीदें बाजार के लिए महत्वपूर्ण आधार बनी हुई हैं। हालांकि, निकट भविष्य में बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल बाजार की एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसले न लें और निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति तथा जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें।

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